1538-ओ मेरे छायादार वृक्ष!
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* डॉ. अंजुल चौहान*
*ओ मेरे छायादार वृक्ष!*
*तुम्हारे साथ एक बार पुनः स्मृतियों में खो जाती हूँ*
*अंकुरण काल से लेकर अब तक की यात्रा दोहराती हूँ*
*...
180
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*1-माँ की ममता/ **अद्विका राउत**-**कक्षा – चार*
***माँ की ममता जैसी मीठी**,*
*न है कुछ भी** दुनिया में ऐसी।*
*रबड़ी**, कुल्फी, आइसक्रीम,*
*चाहे...
वाटिका – मई 2013
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*मित्रो, ‘वाटिका’ की शुरुआत 7 अक्टूबर 2007 में हुई थी। इस ब्लॉग ने पाँच
वर्ष से अधिक का सफ़र कर लिया है। इस सफ़र में ‘वाटिका’ के साथ अपनी
कविताओं/ग़ज़लों क...
DOGS
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—Darshan Mitwa
*When the shopkeeper saw an Income-tax officer, alongwith his four
subordinates, coming in his shop; he at once stood up from his padded se...
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