एक अदालत में मुकदमा पेश हुआ । “साहब, यह पाकिस्तानी है। हमारे देश में हद पार करता हुआ पकड़ा गया है। तू इस बारे में कुछ कहना चाहता है ? मजिस्टेट ने पूछा । मैंने क्या कहना है, सरकार! मैं खेतों में पानी लगाकर बैठा था। हीर के सुरीले बोल मेरे कानों में पड़े। मैं उन्हीं बोलों को सुनता चला आया। मुझे तो कोई हद नजर नहीं आई।
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*गुंजन अग्रवाल*
*माता शे**राँवाली*
*द्वार पड़े तेरे*
*भर दो झोली खाली।*
*माँ वेग सहारा दो*
*भँवर फँसी कश्ती*
*अब मात किनारा दो*
*जागो मैय...
4 days ago